BRICS शिखर सम्मेलन और डीपफेक: फर्जी खबरों की पड़ताल का एक लेखा-जोखा
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान फैलाई गई गलत सूचनाओं और डीपफेक के बढ़ते खतरे पर एक विस्तृत नज़र, जो डिजिटल युग की चुनौतियों को उजागर करती है।
Key Highlights
- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान गलत सूचनाओं का लगातार प्रसार देखा गया।
- डीपफेक तकनीक ने फर्जी खबरों के खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है।
- फैक्ट-चेकिंग संगठनों ने इन भ्रामक दावों का पर्दाफाश करने में अहम भूमिका निभाई।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: गलत सूचनाओं का गढ़
हाल ही में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने वैश्विक मंच पर महत्वपूर्ण चर्चाओं को जन्म दिया। लेकिन इसके साथ ही, डिजिटल परिदृश्य में गलत सूचनाओं और भ्रामक दावों का एक विशाल जाल भी फैल गया। यह कोई नई बात नहीं है; बड़े आयोजनों के इर्द-गिर्द अक्सर ऐसी कोशिशें देखी जाती हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन फर्जी खबरों के तेजी से फैलने का माध्यम बनते हैं, जिससे सच और झूठ के बीच का अंतर धुंधला हो जाता है।
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