भक्ति की गहराई: एक सूक्ष्म काव्य | Furkan S Khan
ईश्वर के प्रति असीम प्रेम और समर्पण को व्यक्त करता एक मार्मिक सूक्ष्म काव्य। जानें भक्ति की अनमोल धारा का गहरा अर्थ।
यह सूक्ष्म काव्य ईश्वर के प्रति अटूट भक्ति और समर्पण को दर्शाता है। कवि कहता है कि ईश्वर हर जगह व्याप्त है, और उसका प्रेम उसी में समाया हुआ है। जब उसे ईश्वर की प्राप्ति हुई, तो उसे सब कुछ मिल गया। अब उसे किसी और चीज़ की चाह नहीं है, केवल ईश्वर ही उसका सर्वस्व है। इसमें 'बलिहारी' का अर्थ है 'न्योछावर' या 'कुर्बान'।
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